वर्मीकम्पोस्ट खाद: प्रकृति का अमृत


र्मीकम्पोस्ट, जिसे केंचुआ खाद भी कहा जाता है, एक अत्यंत पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद है। यह केंचुओं द्वारा जैविक पदार्थों जैसे कि खाद्य अपशिष्ट, पत्तियां, और गोबर को खाने और अपघटित करने की प्रक्रिया से बनती है। केंचुए इन पदार्थों को अपने शरीर से गुजारते हैं, जिससे एक अत्यंत पौष्टिक और सुगंधित खाद बनती है। गोबर की खाद की तुलना में वर्मिकंपोस्ट खाद में 5गुना नाइट्रोजन 7गुणा फास्फोरस 11गुणा पोटास 2गुणा मैग्नीशियम 2गुणा कैल्सियम और 7गुणा एक्टिनोमाइसिटस होता है। 


वर्मीकम्पोस्ट के फायदे

पौधों के लिए पोषण: वर्मीकम्पोस्ट में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम और अन्य आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो पौधों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

मिट्टी की उर्वरता में सुधार: यह मिट्टी की संरचना में सुधार करती है, जल धारण क्षमता बढ़ाती है, और मिट्टी में हवा के संचार को बेहतर बनाती है। रोगों से सुरक्षा: वर्मीकम्पोस्ट में उपस्थित सूक्ष्मजीव पौधों को रोगों से बचाने में मदद करते हैं।

पर्यावरण के लिए सुरक्षित: यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक उत्पाद है जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है।

यह भूमि की उर्वरकता, वातायनता को तो बढ़ाता ही हैं, साथ ही भूमि की जल सोखने की क्षमता में भी वृद्धि करता हैं।

वर्मी कम्पोस्ट देने से अधिक पैदावार होती हैं |

वर्मी कम्पोस्ट वाली भूमि में खरपतवार कम उगते हैं तथा पौधों में रोग कम लगते हैं।

पौधों तथा भूमि के बीच आयनों के आदान प्रदान में वृद्धि होती हैं।

वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने वाले खेतों में अलग अलग फसलों के उत्पादन में 25-300% तक की वृद्धि हो सकती हैं।

मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती हैं। वर्मी कम्पोस्ट युक्त मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश का अनुपात 5:8:11 होता हैं अतः फसलों को पर्याप्त पोषक तत्व सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं।

केचुओं के मल में पेरीट्रापिक झिल्ली होती हैं, जो जमीन से धूल कणों को चिपकाकर जमीन का वाष्पीकरण होने से रोकती हैं।

केचुओं के शरीर का 85% भाग पानी से बना होता हैं इसलिए सूखे की स्थिति में भी ये अपने शरीर के पानी के कम होने के बावजूद जीवित रह सकते हैं तथा मरने के बाद भूमि को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।

वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि करता हैं तथा भूमि में जैविक क्रियाओं को निरंतरता प्रदान करता हैं।

इसका प्रयोग करने से भूमि उपजाऊ एवं भुरभुरी बनती हैं।

यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं।

इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं।

मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।

यह कचरा, गोबर तथा फसल अवशेषों से तैयार किया जाता हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता हैं।

लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से कम होती जा रही मिट्टी की उर्वरकता को इसके उपयोग से बढ़ाया जा सकता हैं।

इसके प्रयोग से फल, सब्जी, अनाज की गुणवत्ता में सुधार आता हैं

केंचुए में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव मिट्टी का pH संतुलित करते हैं।

उपभोक्ताओं को पौष्टिक भोजन की प्राप्ति होती हैं। 

गमले वाले पौधों में वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग कैसे करें?

गमलों में वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग करने के तरीके

मिट्टी के साथ मिलाएं: गमले में पौधा लगाने से पहले, मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट को अच्छी तरह मिला लें। अनुपात: सामान्यतया, मिट्टी के एक भाग में वर्मीकम्पोस्ट का एक भाग मिलाया जाता है। ध्यान रखें कि वर्मीकम्पोस्ट को सीधे पौधे की जड़ों पर न डालें।

ऊपरी परत: पौधे को गमले में लगाने के बाद,ऊपरी परत में थोड़ी सी वर्मीकम्पोस्ट डाल दें। यह पौधे को पोषण प्रदान करेगा और नमी को बनाए रखने में मदद करेगा।

पानी में घोलकर: वर्मीकम्पोस्ट को पानी में घोलकर भी पौधों को दिया जा सकता है। एक लीटर पानी में एक चम्मच वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं और इसे पौधों को पानी देने के लिए उपयोग करें।

पत्तियों पर छिड़काव: पौधों की पत्तियों पर वर्मीकम्पोस्ट का घोल छिड़कने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और कीटों से सुरक्षित रहते हैं।